तमिलनाडु में शराब बिक्री पर बड़ा एक्शन: ‘पार्टी फंड’ नहीं, सरकारी खजाने में पहुंचेगा हर रुपया, सीएम विजय ने भ्रष्ट तंत्र पर कसा शिकंजा
चेन्नई। तमिलनाडु की नई सरकार ने शराब बिक्री व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में शराब की बिक्री से प्राप्त होने वाला प्रत्येक रुपया सीधे सरकारी खजाने में जमा होना चाहिए। किसी भी प्रकार की अनौपचारिक वसूली, राजनीतिक फंडिंग या निजी लाभ के लिए धन के उपयोग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री विजय ने सत्ता संभालने के बाद पहले चरण में राज्यभर में 717 शराब दुकानों को बंद कराने का निर्णय लिया था। अब सरकार ने तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन (TASMAC) के माध्यम से संचालित शराब बिक्री प्रणाली में कथित वित्तीय अनियमितताओं पर कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि शराब कारोबार से जुड़ी एक बड़ी राशि वर्षों से अनौपचारिक रूप से कथित “पार्टी फंड” के रूप में एकत्रित की जा रही थी।
प्रारंभिक जांच में सामने आए करोड़ों रुपये के लेनदेन
सरकारी सूत्रों के अनुसार, शुरुआती जांच में अनुमान लगाया गया है कि यह राशि हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। सरकार का मानना है कि शराब की सप्लाई और बिक्री की प्रक्रिया में कई स्तरों पर अतिरिक्त वसूली की व्यवस्था विकसित हो गई थी, जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंच रहा था।
मुख्यमंत्री विजय ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि TASMAC के थोक और खुदरा नेटवर्क में यदि किसी प्रकार का अनौपचारिक नकद संग्रह तंत्र मौजूद है तो उसे तत्काल समाप्त किया जाए। सरकार का कहना है कि शराब बिक्री से प्राप्त होने वाली आय केवल राज्य के विकास और जनकल्याण योजनाओं में उपयोग होनी चाहिए।
कैबिनेट बैठक में लिया गया बड़ा फैसला
पांच जून को आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में मुख्यमंत्री ने वित्तीय पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि शराब की बिक्री से जुड़ी प्रत्येक वित्तीय गतिविधि का रिकॉर्ड रखा जाएगा और किसी भी प्रकार की अवैध वसूली पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
सरकार को मिली जानकारी के अनुसार शराब की विभिन्न श्रेणियों की पेटियों पर अतिरिक्त राशि वसूले जाने की शिकायतें थीं। इससे हर वर्ष करोड़ों रुपये का संभावित राजस्व प्रभावित हो रहा था। मुख्यमंत्री ने इस व्यवस्था को समाप्त करने और पूरे सिस्टम को डिजिटल निगरानी के दायरे में लाने के निर्देश दिए हैं।
कैसे संचालित होता था पूरा तंत्र
तमिलनाडु में शराब की आपूर्ति विभिन्न आकार की बोतलों के आधार पर पैक की गई पेटियों में की जाती है। जांच में यह सामने आया कि सप्लाई चेन के कई स्तरों पर अतिरिक्त धन वसूले जाने की आशंका है।
वेयरहाउस, परिवहन व्यवस्था और खुदरा बिक्री केंद्रों तक फैले इस नेटवर्क के कारण सरकारी खजाने तक पहुंचने वाली वास्तविक राशि प्रभावित हो सकती थी। अधिकारियों का मानना है कि बड़े पैमाने पर बिक्री होने के कारण छोटी-छोटी अतिरिक्त वसूली भी करोड़ों रुपये के स्तर तक पहुंच जाती थी।
717 शराब दुकानों को किया गया बंद
मुख्यमंत्री विजय के निर्देश के बाद धार्मिक स्थलों, शैक्षणिक संस्थानों और प्रमुख परिवहन केंद्रों के आसपास स्थित कुल 717 शराब दुकानों को बंद कर दिया गया। इनमें मंदिरों और चर्चों के आसपास की दुकानें, स्कूल-कॉलेजों के नजदीक स्थित आउटलेट तथा बस अड्डों व अन्य सार्वजनिक केंद्रों के पास संचालित दुकानें शामिल हैं।
क्षेत्रीय स्तर पर मदुरै, कोयंबटूर, तिरुचि, चेन्नई और सलेम जैसे शहरों में बड़ी संख्या में दुकानें बंद हुई हैं। सरकार ने स्वीकार किया है कि इससे राजस्व पर असर पड़ेगा, लेकिन सामाजिक हित और पारदर्शी शासन को प्राथमिकता दी जाएगी।
आबकारी विभाग में भी बदलाव
राज्य सरकार ने प्रशासनिक सुधारों के तहत वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पूजा कुलकर्णी को आबकारी आयुक्त नियुक्त किया है। उनसे उम्मीद की जा रही है कि वे शराब बिक्री प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करेंगी।
आबकारी मंत्री विग्नेश ने भी कहा है कि खरीद प्रक्रिया, मूल्य निर्धारण और बिक्री प्रणाली में सुधार किए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि शराब बिक्री से प्राप्त होने वाला पूरा राजस्व राज्य सरकार के खाते में जाएगा और किसी भी स्तर पर अनियमितता पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
21 वर्ष आयु सीमा और सख्त निगरानी
सरकार ने शराब खरीदने के लिए न्यूनतम आयु सीमा 21 वर्ष निर्धारित करने के साथ-साथ पहचान पत्र और सत्यापन प्रक्रिया को भी अनिवार्य बनाया है। नियमों का उल्लंघन करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर सरकार का जोर
तमिलनाडु सरकार का कहना है कि यह अभियान केवल राजस्व बढ़ाने का नहीं बल्कि शासन में पारदर्शिता स्थापित करने का प्रयास है। मुख्यमंत्री विजय ने संकेत दिया है कि किसी भी व्यक्ति, अधिकारी या प्रभावशाली समूह को नियमों से ऊपर नहीं माना जाएगा। आने वाले समय में जांच के आधार पर और भी कदम उठाए जा सकते हैं।
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