मेवात में साइबर‘ठगी के गढ़’ पर पुलिस का वार, क्या जड़ से मिटेगा नेटवर्क?
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हरियाणा के मेवात में 'ठगी का गढ़' उजागर: 11 गिरफ्तार, 25 फर्जी सिम बरामद, साइबर ठगी के नए केंद्र नूंह में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 11 पकड़े गए; लेकिन क्या यह काफी है?, राजस्थान तक फैले साइबर ठगों के जाल का नूंह में खुलासा, पकड़े गए 11 आरोपी।
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नूंह, (P18News/डीसी नहलिया) जिला पुलिस ने साइबर ठगी के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के बाद, पुलिस ने 11 मोबाइल फोन और 25 फर्जी सिम बरामद किए हैं, जिससे इस क्षेत्र में फैल रहे संगठित अपराध के नेटवर्क की गहराई का पता चलता है। हालांकि, इस गिरफ्तारी के बाद पुलिस प्रशासन की पिछली कार्रवाइयों और इस क्षेत्र में साइबर ठगी के लंबे समय से जारी रहने पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
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यह कार्रवाई तीन अलग-अलग मामलों के तहत की गई, जिसमें पुलिस ने इन आरोपियों को दबोचा। इनमें से दो आरोपी पड़ोसी राज्य राजस्थान के हैं, जिन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कई राज्यों में लोगों को अपना शिकार बनाया था। यह दिखाता है कि न केवल नूंह के स्थानीय अपराधी इस धंधे में शामिल हैं, बल्कि इसका नेटवर्क अंतर-राज्यीय है।
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पिछले कई सालों से नूंह और मेवात का इलाका साइबर ठगी का केंद्र बनता जा रहा है। यहाँ तक कि इस क्षेत्र को "साइबर ठगी का हब" भी कहा जाने लगा है। ऐसे में, यह सवाल उठना लाज़मी है कि इस तरह के बड़े गिरोह इतने लंबे समय तक बिना किसी रोक-टोक के कैसे काम करते रहे? क्या पुलिस प्रशासन को इसकी भनक नहीं थी? या फिर इन पर कार्रवाई करने में इतनी देर क्यों हुई?
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कई रिपोर्ट्स और पुलिस के अपने ही रिकॉर्ड बताते हैं कि इस इलाके में हर दिन सैंकड़ों लोग साइबर ठगी का शिकार होते हैं। ठगी का तरीका भी बहुत ही सामान्य है - लॉटरी जीतने का झांसा देना, फर्जी नौकरी का वादा करना, या फिर किसी सरकारी योजना के नाम पर ठगी करना। इन तरीकों के बावजूद, पुलिस इन गिरोहों पर लगाम लगाने में विफल रही है।
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आज की यह कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन इसे सिर्फ एक शुरुआत के तौर पर देखा जाना चाहिए। यह सिर्फ एक गिरोह है, जबकि नूह में ऐसे कई गिरोह सक्रिय हैं। क्या पुलिस ने इन 11 आरोपियों से पूछताछ कर बाकी गिरोहों के बारे में जानकारी हासिल की है? क्या पुलिस ने इस पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की कोई योजना बनाई है?
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इस घटना से यह भी स्पष्ट होता है कि पुलिस को अपने इंटेलिजेंस नेटवर्क को और मजबूत करने की जरूरत है। अगर पुलिस समय रहते इन गिरोहों का पता लगा लेती तो शायद लाखों लोग अपनी मेहनत की कमाई गंवाने से बच जाते।
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पुलिस ने इन 11 आरोपियों के खिलाफ सात प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। उम्मीद है कि पुलिस इस मामले की गहराई से जांच करेगी और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलवाएगी। लेकिन, जब तक पुलिस प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से नहीं लेता, तब तक नूंह साइबर ठगी का केंद्र बना रहेगा। यह कार्रवाई महज एक प्रतीकात्मक कदम न होकर, इस समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में एक बड़ी पहल होनी चाहिए।
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