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ब्रह्मलीन हुए नागा बाबा जय गिरि महाराज जी, सनातन संत परंपरा को अपूरणीय क्षति

 ब्रह्मलीन हुए नागा बाबा जय गिरि महाराज जी, सनातन संत परंपरा को अपूरणीय क्षति

फोटो श्री श्री 1008 नागा बाबा जय गिरि महाराज जी

डीसी नहलिया (फिरोजपुर झिरका) सनातन धर्म के वरिष्ठ तपस्वी और नागा संप्रदाय के प्रतिष्ठित संत नागा बाबा जय गिरि महाराज जी का ब्रह्मलीन होना संत समाज और धर्म प्रेमियों के लिए गहरा आघात है। उनके देहावसान से सनातन परंपरा ने एक ऐसे साधक को खो दिया, जिन्होंने तप, त्याग, साधना और वैराग्य को अपने जीवन का मूल आधार बनाया। नागा बाबा जय गिरि महाराज जी को अखंड और कठोर तपस्या के लिए जाना जाता था। उनकी साधना का प्रमुख केंद्र हनुमान घाट मंदिर रहा, जबकि झिरका की पहाड़ियों में स्थित प्राचीन मोर कुटी वर्षों तक उनकी तपोभूमि बनी रही। इस स्थल पर उन्होंने दीर्घकाल तक एकांत साधना कर सनातन चेतना को सुदृढ़ किया। स्थानीय श्रद्धालुओं के अनुसार मोर कुटी क्षेत्र आज भी उनकी तपस्या की ऊर्जा का साक्षी माना जाता है। महाराज जी प्रभु श्रीराम के अनन्य भक्त तथा बजरंगबली के परम उपासक थे। उनका संपूर्ण जीवन रामभक्ति, हनुमान आराधना और शिव साधना को समर्पित रहा। संत समाज में वे अनुशासन, सादगी और वैराग्य के प्रतीक के रूप में प्रतिष्ठित थे। उनकी दिनचर्या में जप,

ध्यान और सेवा का विशेष स्थान रहा, वहीं मानव कल्याण को वे धर्म साधना का अनिवार्य अंग मानते थे। नागा बाबा जय गिरि महाराज जी का प्रभाव केवल किसी एक क्षेत्र या धाम तक सीमित नहीं रहा। देश के विभिन्न धार्मिक स्थलों और सनातन आयोजनों में उनकी उपस्थिति को विशेष महत्व दिया जाता था। वे उपदेशों से अधिक अपने आचरण के माध्यम से साधना और धर्म का मार्ग प्रशस्त करने वाले संत थे। महाराज जी के ब्रह्मलीन होने की सूचना मिलते ही विभिन्न अखाड़ों के साधु-संत, नागा संन्यासी तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु अंतिम दर्शन के लिए एकत्र हुए। सनातन परंपराओं के अनुसार महाराज जी को सनही शर्वशियों द्वारा अंतिम विदाई दी गई। अंतिम संस्कार के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और जयघोष से वातावरण गंभीर और भक्तिमय बना रहा। संत समाज ने नागा बाबा जय गिरि महाराज जी के ब्रह्मलीन होने को सनातन धर्म के लिए अपूरणीय क्षति बताया है। श्रद्धालुओं का कहना है कि उनका तपस्वी जीवन, सरल स्वभाव और करुणामय दृष्टि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। प्रभु श्रीराम, बजरंगबली और महादेव से प्रार्थना की गई कि वे महाराज जी की दिव्य आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा उनके अनुयायियों और भक्तों को इस दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। नागा बाबा जय गिरि महाराज जी का नाम और उनकी साधना सनातन परंपरा में सदैव स्मरणीय रहेगी।

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